Tuesday, December 11, 2007

तुम रहती हो...

तुम सोचोगी क्यों इतना
में तुमसे प्यार करूं।

तुम समझोगी दीवाना,
में भी इकरार करूं।

दिवानो कि ये बातें,
दीवाने जानते हैं।

जलने में क्या मज़ा है,
परवाने जानते हैं।

तुम यूँ ही जलाते रहना,
आ आ कर ख्वाबो में,

पल पल दिल के पास...

तुम
रहती
हो।

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