Sunday, October 18, 2009

Heard Somewhere.. long ago..

एक बोहोत पुरानी ग़ज़ल याद आ गए आज.....  No idea who is the author. I had heard it on a private tape almost twenty years ago.  But it seemed to real.....


तीर से , दिल पे, उन्हें देख कर चल जाते हैं,
कितने आंसू, मेरी आँखों में, यूंही मचल जाते है.

जब वो होते हैं मेरे पास, तौ होते हैं मेरे,
गैर की बज्म में, क्यों जाने बदल जाते हैं