Tuesday, October 16, 2007

तू नहीं तो - Anotther ghazal from Arth

तू नहीं तो
जिन्दगी में
और क्या
रह जाएगा

दूर तक
तनहाइयों का
सिलसिला
रह जाएगा

दर्द की
सारी तहे
और सारे
गुज़रे हादसे

सब धुँआ
हो जाएगा
इक वाकया
रह जाएगा

यूँ भी होगा
वो मुझे
दिल से भुला
देगा मगर

ये भी होगा
खुद उसी में
इक खला
रह जाएगा

दायरे इंकार के
इकरार की सरगोशियाँ
ये अगर टूटे
तो बस फासला
रह जाएगा

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