तू नहीं तो
जिन्दगी में
और क्या
रह जाएगा
दूर तक
तनहाइयों का
सिलसिला
रह जाएगा
दर्द की
सारी तहे
और सारे
गुज़रे हादसे
सब धुँआ
हो जाएगा
इक वाकया
रह जाएगा
यूँ भी होगा
वो मुझे
दिल से भुला
देगा मगर
ये भी होगा
खुद उसी में
इक खला
रह जाएगा
दायरे इंकार के
इकरार की सरगोशियाँ
ये अगर टूटे
तो बस फासला
रह जाएगा
Tuesday, October 16, 2007
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