Sunday, September 13, 2009

तेरी आरजू

तेरी आरजू में वो ख्वाबों का बुनना
तेरी जुस्तजू में मचलते ही
जाना,


यूँ हर वक़्त तेरे ख्यालों में रहना,
तेरी ही यादों का आशिक हो जाना,

वो मिलके गले तुमसे शिकवा भी करना,
फिर हाथों को थामे चलते की जाना


बहकते बहकते संभलने की कोशिश,
संभलते संभलते फिर बहक जाना,

वो ढेरों सी बातें, वो बारिश की रातें,
वो बातों ही बातों में रूमानी हो जाना,

वो होठों का छूना, वो बाहों में आना,
मीठे से ख्वाबों का सच हो जाना,

वो आंखों में हलकी शरारत का होना,
वो सूरत का आखों में यूँ समा जाना,

अब लग के गले तुमसे मुझे ये है कहना,
के अब जब भी आओ, वापस न जाना

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