है बस के हर एक उनके इशारे में निशाँ और,
करते है मोह्हबत तो गुज़रता है गुमान और।
या रब वो न समझे है, न समझेगे मेरी बात,
दे और दिल उनको जो न दे मुझको जुबां और।
है और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे ,
कहते हैके गालिब का है अंदाज़-ऐ-बयां और।
Tuesday, March 3, 2009
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